इस अंक के रचनाकार

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रविवार, 2 जून 2013

पानी म जादू



  • नंदकुमार साहू
कोन जनी वो पानी म का जादू हे।
आज सबो मनखे मन ओकरेच काबू हे॥
    मनखे वोला नइ पीयत हे,
    वो मनखे ल पीयत हे।
भरे जवानी कुकुर गत होके,
डोकरा बरोबर जीयत हे॥
    पंडा पुजेरी घलो बिगड़गे,
    दिखत भर के साधू हे,
कोन जनी वो पानी म का जादू हे।
आज सबो मनखे मन ओकरेच काबू हे॥
    चाहे होवय छट्ठी बरही,
    चाहे होवय बिहाव।
चाहे होवय होरी देवारी,
चाहे कोनो चुनाव॥
    तिहार बार काम कारज म,
    एकरे बेवसथा आगू हे।
कोन जनी वो पानी म का जादू हे।
आज सबो मनखे मन ओकरेच काबू हे॥
    जंगलिहा मन बर छूट हे,
    एकरे आड़ म लूट हे।
का गाँव कँहव, का कँहव सहर,
भटï्ठी वोकर पाँव पूट हे॥
    एक बिरोधी कतको खुरचे,
    सरकार डहर ले लागू हे,
कोन जनी वो पानी म का जादू हे।
आज सबो मनखे मन ओकरेच काबृ हे॥
    अइसन का मीठ घोरााय हे,
    जेमा उही म सबो मोहाय हे।
लइका सियान बुढ़वा जवान
पी के सब झन भकवाय हे॥
    जान सून के जहर पियत हे,
    आँखी सबके पाछू हे
कोन जनी वो पानी म का जादू हे।
आज सबो मनखे मन ओकरेच काबू हे॥
ग्राम धामनसरा (मोखला),पोष्ट - सुरगी, जिला राजनांदगांव (छग)



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