इस अंक के रचनाकार

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मंगलवार, 25 जून 2013

अगमजानी


  • मंगत रवीन्द्र

एक झन डोकरी रहिस तेकर एक ठन नाती ... नाती के नाव डहारु। दाई - ददा नई रहिस, नानपन के मुरहा ए। बूढ़ी दाई हर पालपोस के बढ़ावत हे। ओकर दाई - ददा मन डहारु के नानपन म पर्रा म बिहाव कर देहे रहीन। अतका गेदा के डहारु ल अपन बिहाव के सुरता नइ रहिस।
एक दिन बूढ़ी दाई ल कथे - दाई, पारा के जम्मों टूरा - टूरी मन के बिहाव होगे। मोरो बिहाव ल कर देते। सुन के डोकरी हाँसत कथे - बेटा, तोर नानपन के बिहाव होगे हे। जा, तोर दुलही ल देख के आ जा। बाढ़ गे होही। अतका ल सुन  के डहारु कुलक भरिस अऊ बिहान दिन सम्हर-पकर के दूल्हीन देखे बर चल दिस। इचबन बीच बन पकइ नार तीन ठन, सूक्खा ठिड़गा ठाय करें बुड्ढा भालू हाय करे जइसे बन ल नाहकत गइस। एक गांव नाकिस, दूसर गांव नाकिस नाकत-नाकत कई गांव के बाद तीसरावन दिन संझवाती एक गांव म हबरिस। बेरा बुड़त रहै...मुंधियार के करिया हर चारों डहर बगरत हे। कुकरी - कुकरा अपन गोधा म सकलागे हें। गाय - गारु कोठा के खूंटा म बंधाए पैरा ल पगुरात हे।
डहारु गुनथे - मुधियार होगे। इही गांव म रात काट लौं। बेर उही तहाँ ससुरार ल खोजिहौं ... अऊ का, बस्ती के छें घर के ओइरछा म अपन पटकू ल दसा के सूतगे। नींद नइ परे ए। ओ घर म एक झन डोकरी एक झन छोकरी रहै। रतिहा होगे। नानकुन दीया धीमिक - धीमिक बरत रहै। डोकरी अऊ छोकरी नइ जानत रहैं के हमर ओइरछा म कोनो परदेसी आ के डेरा डारे हे। ओ तो बाहिर के फरिका ल दे के घर भीतर हावैं ...।
ओ रात डोकरी दाई के घर अंगाकर रोटी बने रहै। जेवन के बेरा ए। डोकरी हर रोटी ल झर्राके टोरत रहिस त तीन टुकड़ा होगे। एक फारी ल नोनी ल देइस अऊ एक फोरी ल अपन खाइस। नोनी पूछथे - दाई, ए फोरी काकर ए ?
- टोरत - टोरत, टूटगे ... जा, एला पठेरा म रख दे। नोनी हर घेरी बेरी पूछै। डोकरी कहै - टोरत - टोरत टूटगे। छोकरी मानबे नइ करै आखिर म असकटाके कहिस - तोर दूल्हा बर ए ...। तहां नोनी हर एक फारी रोटी ल पठेरा म टाँग दीस। एती सब गोठ ल आँट म सुते परदेसी हर सुनत रहै। खाइन - पीइन, दीया बुझागे, सूत गीन ...।
बेरा उइस। चिरई - चुरगुन मन ए डारा ले ओ डारा करे लगीन। गाय - गोरु रम्भात हे। पनिहारिन पानी भरत हे। सीमंदिर म शंख धुनी होवत हे। तहाँ आँट के परदेसी आँखी निंमजत उठगे। गांव - गली के रेंगइया एक झन ल पूंछथे के लटियारिन डोकरी के घर कहाँ लंग हे ?
- जेकर आँट म सुते रहे उही तो लटियारिन माई के घर ए। सुन के थोकिन अचरित होइस। तहाँ कुलक भरिस। गुनथे - सारे बुजा ल चुक होगे। रात भर गुड़ चबवाए हौं। कोरा म लइका अउ गाँव भर हिंदोल। तहाँ दसना पटकू झर्रावत, खखारत घर कती समाइस।
लटियारिन दाई अंगना के मचिया म बइठे माखुर मलत रहै। पहुना ल देखिस तहां टुरी ल कथे - मोंगरा, पहुना कस लागथे बेटी। ला पानी - पीढ़ा दे। नोनी लाइस पानी दीस। पीढ़ा दीस। तहां डोकरी हर पूंछथे - बाबू, चीन नइ पावत हौं। बता तो कहाँ ले आवत हस बेटा ? पहुना कहिस - करमपुरा के जनक के बेटा औं दाई। अतका ल सनीस तहाँ डोकरी लटियारिन कुलक भरिस। कहिस - कती के राजा मरिस त आए हस बेटा। बने - बने हे घर डहर। तोर बूढ़ी दाई बने हे ?
- हां, सब बने हे। डोकरी के मन तरंग होगे। नाती दामाद आ गे। ले मोंगरा, तोर ओई ए ... जल्दी जेवन बना अऊ तोर धनी ल परोस के खवा - अतका ल सुनीस त मोंगरा नोनी लजा भरिस। ओतके बेरा टूरा कहिस - रात के मोर रोटी कुटा ल देवौ। जेला पठेरा म टांगे हौ। भूख म पेट अगियावत हे। अतका ल सुनीस त लटियारिन डोकरी अचरज होगे के रतिया के रोटी ल कइसे जानीस। हो न हो दमाद बाबू अगमजानी ए। फेर अऊ का। नोनी मोंगरा हर धनिया पताल के चटनी पीस कटोरा म लान मढ़ा दीस। डहारु भूखाए रहिस। हिया लगा के खाइस।
लटियरिन डोकरी तो पचरहीन ए। एक्के घरी म रोटी के गोठ ल गांव भर बगरा डारिस। ए कान ले ओ कान बगरगे - लटियारिन के नाती दमाद हर अगमजानी ए। राज के राजा तक गोठ हबरगे। कान ले कान सुनीन, आए हे अगमजानी। गाँव के पंडित किसान अऊ अड़हा गुनी ज्ञानी।
एक दिन राज के राजकुमारी हर सात चेरिया आगू, सात चेरिया पाछु लेके सरोवर नहाए गीस। अंग - अंग के गहना उतार के मल - मल के नहा हे। लछिमन पखरा निरमल पानी। पार के बिरुवा म कोइली बानी। फूल कमल सेत बरन, भौंरा मन गुनगुनावत हे।
बिरीछ तरी पठरु पगुरावत चेरिया सबो नहावत हे। जम्मो नहा खोर के मांजे गहना गुजरिया दौरी म धरिन अऊ राजमहल ल लौटिन। राजकुमारी फेर सिंगार करथे त ओकर पांव के एक ठन बिछिया नइ रहै। खोज डरिन मिलीस नहीं। गइस त गइस कहाँ ? सातों चेरिया सहित हलाकान। राजकुमारी रो - रो के आँखी ल फुलो डारिस। बात राजा के कान म हबरगे के बेटी के ए हाल। मंत्री कथे - राजा साहब, हमर राज म अगमजानी आए हे। राज दरबार म बला के बिचार करवाया जाए। मंत्री के बात राजा ल बने लागीस अऊ बनसेर गाँव दूत भेजे गइस।
डोकरी लटियारिन के अंगना म राजा के दूत हबरगे। राजकुमारी के दसा ल बताइस अऊ कहिस के राजा के आज्ञा हे अगमजानी हर राजदरबार म जाए अऊ राजकुमारी के गंवाएं बिछिया ल बताए। मुंह मांगा इनाम मिलही। राजा के दूत ल देख के डहारु के पागी ढिलियागे। ओ कब के अगमजानी ए ? आँट म सुते रहिस त रोटी ल जानीस। अब एला  कइसे जानही ? पर धीरज धरके कथे - चलौं, तोर हबरते सांत राजदरबार म पहुंच जाहूं। दूत चल दिस।
एती दमाद बाबू ल भूख पियास नइ हे। गुनान पेल दीस। गाल ल थपके - थपके गुनत हे - मोर पुरगे। गड़हरा धंधागै। डोकरी रोटी के गोठ ल बगरा के मोर जी के काल कर दीस। संसो के पूरा म पोहावत जावत हे। घरी घरी पहार होगे। मुड़ धरे मचिया म बइठे हे तिही बेरा दु झन मुटियारी मन हफरत चोकरत आ के दमाद बाबू के गोड़ तरी गिरत कथे - अगमजानी बाबू, हमर नाव झन लेबे। हमन राजकुमारी के चेरी अन। लालच म ओकर एक ठन बिछिया ल सरोवर के घठोन्धा पखरा तरी लुका दे हन। नाव बताए तहां हमर पुरगे। फांसी दिही। हमर कोरा म नान - नान गेदा लइका हे। ले ए दे हमर गला के हार ल। नाव छिपा के बिछिया गवाएं के नाम ले देबे। तोरो मान रही। हमरो जान बचही। अतका ल सुनीस त दमाद बाबू पहली तो अपन अंगठी ल दांत म चबाइस फेर तरी - तरी अनंद मगन होगे। कहिस - जाओ छुछिन्द होगे। ओती ल बना लेहूं। बिचारी मन ल हाय जी लागीस अऊ चल दीन।
एती अगमजानी दमाद बाबू सावन कस घटा राजा के दरबार कती रेंगीस। खसखस ले राज दरबार लगे रहै। अगमजानी ल देख के सभा मन उठ के सनमान करिन। ऊँचा आसन म बइठारिन फेर राजा साहेब हर अपन राजकुमारी के हाल ल सुनाइस। अगमजानी कथे - राजा साहब, ए लिखरी बात म संसो करत हौ। सरोवर के घाट पखरा के सांटा म बिछिया परे हे। जा के ले आओ। राजा साहब तुरते दूत भेजिस। पखरा टार के देखथें ता दगदग ले बिछिया परे रहे। ए दे लाइन। राजकुमारी के आँसू थिरकीस अऊ रंगमहल म आनंद बधाई होइस। अगमजानी ल खूब इनाम देके बिदा करिन। दमाद बाबू अपन दुलरी ल गवना कराके अपन घर लाइस सुख म जिंनगी पहावत हे।
मोंगरा फुलगे, किस्सा पुरगे। ए गांव ले ओ गांव जुरगे।।

  • शास. उच्च. माध्य. विद्यालय, कापन, जिला - जांजगीर - चाम्पा ( छ.ग.)

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