इस अंक के रचनाकार

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गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की कविताएं

लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
■ दीवार पर टँगी तस्वीर ■
घर के ड्राइंग रूम के दीवार पर 
श्याम श्वेत रंग की टँगी 
एक पुरानी सी तस्वीर
जब भी देखता हूँ उस तस्वीर को
जिसमें दादा दादी माँ बापू संग
ढेरों यादें सामने आने लगती हैं
छोटा भाई व प्यारी बहन
तस्वीर लगता जैसे बोलती है
चलचित्र की तरह घूम जाता है
वह तस्वीर जो आज भी निशानी है
जिसमें बचपन की ढेरों कहानी है
दादा संग बाज़ार को जाना
ज़िद कर खिलौनों को लाना
घर आते ही शुरु होती लड़ाई
खिलौना कभी मैं लेता कभी लेता भाई
बहना तो कभी न पाती
फिर शुरु होती उसकी रुलाई
चौके में नीचे साथ बैठ कर खाना 
पढ़ने के लिए कितना होता बहाना
गाँव का वह प्राइमरी स्कूल
पढ़ने के लिए हाथ पे पढ़ता था रूल
दोस्तों संग पढ़ना लिखना
खेल खेलना और था झगड़ना
रात में दादी के लोरी कहानी को सुनना
उस एक पुरानी तस्वीर में 
एक युग है समाहित
बापू का हमको नसीहतों को देना
भोर होते ही पढ़ने को उठाना
सारे पाठ को याद करके सुनाना
गाँव का वह घर आता है याद
साईकल खरीदने को मम्मी से फ़रियाद
याद आते चाचा चाची व गाँव के लोग
छोटे से घर में सब रहते थे प्रसन्न
न ही शिकायत न रहता कोई खिन्न
मिल जुल कर सब रहते थे साथ
घर के कामों में सब बटाते थे हाथ
काश! वह लौट आए बचपन
रिश्तों में रहता था कितना अपनापन।।

★सूरज की पहली किरण★
सूरज की पहली किरण 
जब धरा पर आती है
रात का तम मिटाती है
करती है पृथ्वी पर
प्रकाश का विस्तार
सभी प्राणियों में नई ऊर्जा
स्फूर्ति का करती है नव संचार
पनपती है नित नई आस
जीवन के प्रति दृढ़ होता है
एक नया विश्वास
सूरज की पहली किरण
कितना कुछ बदल देती है
हमारे जीवन के भी 
तिमिर को भी हर लेती है
अतीत में हुई गलतियों से
हम सबक सीखते हैं
उस पर करते हैं चिंतन मनन
फिर सफ़ल हो जीतते हैं
हम में भर जाता है 
कितना ऊर्जा व उत्साह
और ख़ुशी से हम जीवन जीते हैं
सूरज की पहली किरण की तरह
औरों के जीवन में 
हम भी प्रकाश भर सकते हैं
उन्हें ख़ुशियाँ दे सकते हैं।

 ★ प्रेम का एहसास ★
माँ का गोदी में बच्चे को दुलराना
कुम्हार का दीये बनाना
ये सूरज चाँद सितारे
सब में प्रेम के होते इशारे।।
रात में हम देखते 
प्रियतम के सपने
उष्ण में वर्षा का जल
किसान को लहलहाते फसल
नदियों में कल कल बहता जल
ये सब मचाते हैं प्रेम के हलचल।।
आम के पेड़ पर जब 
कोयल की कूक
गुलाब व चंपा के 
फूल की महक
मंदिर में बजते हैं घंटे
मस्जिदों में होते हैं अज़ान
हम पढ़ते हैं रामायण या क़ुरान
सब में प्रेम का मिलता है ज्ञान।।
प्रेम में टूटती हैं 
जाति धर्म की वर्जनाएँ
खत्म हो जाती है 
नफ़रत की दीवार
हर चीज में लगता है अपनापन
बस! होता है दीवानापन
प्रेम अमर है
प्रेम को मिटा नही सकते
उसमें हमें बहना है
प्रेम में हमें जीना है।।
                                                 
साहित्यिक परिचय 
नाम--  लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
स्थायी पता--ग्राम-कैतहा,पोस्ट-भवानीपुर, जिला-बस्ती
                  272124 (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल : 7355309428
ईमेल  laldevendra706@gmail.com
शिक्षा --बी. एससी.,बी. एड., एल. एल बी., बी टी सी.
( शिक्षक, कवि, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता )
लेखन की विधा --कविता/कहानी/लघुकथा/लेख/बाल कविता
प्रकाशन -संगिनी, साहित्यनामा, साहित्यञ्जली प्रभा, सत्य की मशाल, लोकतंत्र की बुनियाद, कविताम्बरा, रचना उत्सव, काव्य कलश,जय विजय, जयदीप, विचार वीथिका, साहित्यनामा(द फेस ऑफ इंडिया), खुश्बू मेरे देश की, उजाला मासिक, शब्द शिल्पी, माही संदेश पत्रिका, सच की दस्तक, अनुभव, बचपन, संगम सवेरा, अविचल प्रभा, रजत पथ, सेतु, आदित्य संस्कृति, द अंडरलाइन, देवपुत्र, बच्चों का देश, आदि पत्रिकाओं में 160 से कविताएं, कहानियां व लघुकथा प्रकाशित व राष्ट्रीय स्तर अधिकतर समाचार पत्रों में अब तक 500 से अधिक रचनाओं का प्रकाशन साथ ही साँझा काव्य संकलन "साहित्य सरोवर","काव्यांजलि", "बंधन प्रेम का" "अभिजना", "अभीति", "काव्य सरोवर", "निभा", "काव्य सुरभि", " पिता" प्रकाशित व लगभग आठ साँझा काव्य संकलन व एक लघुकथा साँझा संकलन प्रकाशन के अधीन। साथ ही "नव किरण" का संपादन।
सम्मान -- "साहित्य सरोवर",साहित्य साधक अलंकार सम्मान-2019,"काव्य भागीरथ सम्मान" "अभिजना साहित्य सम्मान" वीणा वादिनी सम्मान-2020, " काव्य श्री सम्मान-2020" सहित दो दर्जनों से अधिक साहित्यिक सम्मान व कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित।

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