इस अंक के रचनाकार

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रविवार, 28 जून 2020

बरखा रानी

बिहारी साहू सेलोकर 

हरा भरा अब करने सब को,आ गई बरखा रानी
आषाण का महिना लगते ही,रिमझिम बरसे पानी
हरा भरा अब करने सब को,आ गई बरखा रानी

सूखे जमीन भी अब गीली हो गई।
आसमान भी अब नीली हो गई
अच्छे अच्छे घरों मे भी अब छत से टपकता पानी
हरा भरा अब करने सब को,आ गई बरखा रानी

नदी तालाब सब छलकने लगा है।
कोयल मोर भी अब चहकने लगा है
घर पर बैठी दादी मॉ भी अब,कूटने लगी है घानी
हरा भरा अब करने सब को,आ गई बरखा रानी

पेड पौधा भी सारे अब मूस्कूराने लगे है
झूमझूम कर सब नाचने और,गाने लगे है
भौरा भी गूनगूनाते हूऐ अब करने लगी है मनमानी
हरा भरा अब करने सब को आ गई बरखा रानी

सारे जहॉ मे गूंज रहा है,किसानो की किलकारी
वैसे हीं पावन निर्मल है,मेरे छत्तीसगढ महतारी
सोंच सोंच कर गीत बरखा के मैं लिख रहा हू बिहारी
हरा भरा अब करने सब को आ गई बरखा रानी

आषाण का महिना लगते हीं,रिमझिम बरसे पानी
हरा भरा अब करने सब को आ गई बरखा रानी

ग्राम - धारिया, पोष्ट पदमावतीपूर 
छूईखदान जिला राजनॉदगॉव ( छत्तीसगढ )

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