इस अंक के रचनाकार

आलेख दान देने का पर्व छेरछेरा / सुशील भोले भारत में लोक साहित्य का उद्भव और विकास / डॉ.सुशील शर्मा राज धरम यहै ’सूर’ जो प्रजा न जाहिं सताए / सीताराम गुप्ता स्वामी विवेकानंद और राष्ट्रवाद / मधुकर वनमाली मड़वा महल शिव मंदिर भोरमदेव / अजय चन्द्रवंशी शोघ लेख भक्ति में लालसा का लिंग निर्धारण, पश्चिमी ज्ञान मीमांसा और मीरा / माधवा हाड़ा कहानी इक्कीस पोस्ट / डॉ. संजीत कुमार जिन्‍दगी क्‍या है / बलवीन्‍दर ' बालम ' लघुकथा स्टार्ट अप / विनोद प्रसाद सबक / श्रीमतीदुर्गेश दुबे मदद / रीतुगुलाटी ऋतंभरा बिल्ली / सुनिता मिश्रा सूत्र / सुरेश वाहने छत्तीसगढ़ी व्यंग्य झन्नाटा तुँहर द्वार / महेन्द्र बघेल गीत / गजल/ कविता खुशियों का संसार बना लें (बाल कविता) ओंकार सिंह ’ ओंकार’ बेबसी को दर्द की स्याही में / गजल/ प्रिया सिन्हा ’ संदल’ जड़ से मिटाओ/गीत/ अशोक प्रियबंधु, सहरा में जब भी ... / गजल/ स्वरुप , जब - जब हमनें दीप जलाये / गीत / कमल सक्सेना कवि एवं गीतकार आशा की उजियारी / गीत / जनार्दन द्विवेदी बगुला यदि सन्यासी हो तो समझो /गजल/ नज्¸म सुभाष कितना कुछ कह रहा है .../ गजल / पारुल चौधरी अपने - अपने ढंग से ही सब जीते हैं /नवगीत /जगदीश खेतान आदमियत यदि नहीं तो .../कविता/ राघवेन्द्र नारायण मिले थे यक - ब - यक/ गजल / किसन स्वरुप अनदेखे जख्¸म/ गजल / गोपेश दशोरा छन्द युग आएगा/ गीत/ डॉ. पवन कुमार पाण्डे प्यारी बिटिया / गीत/ नीता अवस्थी इश्क में मुमकिन तो है ...गजल/ तान्या रक्तिम अधरों के पंकज उर / गीत/ संतोष कुमार श्रीवास हे वीणा वादिनी माँ / गीत /स्वामी अरुण अरुणोदय प्रेरणा/ कविता/ नरेश अग्रवाल, बसन्त फिर से .../ नवगीत / डॉ सीमा विजयवर्गीय नवीन माथुर पंचोली की रचनाएँ तोड़ती रहती हर रोज/ कविता/ कविता चौहान कितना सूना है जीवन / कविता/ उषा राठौर उम्मीदों की झड़ी से लब दब गया किसान / कविता/ सतीश चन्द्र श्रीवास्तव परेश दबे ’साहिब’ की ग़ज़लें पाँव में छाले हैं ... / कविता/ यशपाल भल्ला बुरे हैं भले हैं ... कविता/ एल एन कोष्टी पीली पीली सरसों फूली/ नवगीत /हरेन्द्र चंचल वशिष्ट तुम/ नवगीत जिंदगी क्या थी .../ नरेन्द्र सिंह दीपक लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की कविताएँ केशव शरण की कविताएं मोह - गँधी गीत बन/गीत/ कृष्ण मोहन प्रसाद ’मोहन’, चाहता वो हमें इस दिल में .../ गीत/ प्रदीप कश्यप आत्ममंथन / गीत / दिनेश्वर दयाल मुस्कुराया बहुत / गीत/ किशोर छिपेश्वर ’ सागर’ इजहार / गजल /मधु’ मधुलिका’ मदारी और बंदर काका / बाल गीत / कमलेश चन्द्राकर मन का भटका कविता राजेश देशप्रेमी आया जाया करो / कविता / ऋषि कुमार पुस्तक समीक्षा संदेशो इतना कहियो जाय :कहानी संग्रह .

रविवार, 20 फ़रवरी 2022

मदद

रीतुगुलाटी ऋतंभरा

         बहु बेटा से इतर जब सासू माँ ने अपने नये घर हवन पूजन करवाया तो बहू को अनमने मन से आना पड़ा। सासू माँ ने स्वागत मे कोई कमी न छोड़ी थी। एक आदर्श बहू का तमगा लेने की बारी अब बहू की थी। अपनी तरफ से वो अच्छा कर रही थी ... पर ये क्या! साँयकाल होते - होते उसकी गारंटी खतम हो गयी। काम करने की। जैसे - तैसे सासू माँ ने रात का खाना निपटाया। अब अगले दिन भी उसने हाथ खड़े कर दिये और वापिस जाने हेतु पैकिंग के बहाने कमरे में ही घुसी रही। इधर रात के जूठे बरतन मुँह चिड़ा रहे थे। जब बेटे ने अपनी पत्नी का ये हाल देखा तो वो भीतर ही भीतर कुड़ने लगा। समझ गया। मेरी माँ ने मुझसे इतर ये घर को क्यों चुना? मेरे बार - बार कहने पर भी माँ मेरे साथ क्यों नही रहना चाहती? तभी माँ ने बेटे के मन की बात को महसूसा। उसने प्यार से बेटे के सिर पर हाथ फेरा, और भारी मन से कहा - बेटा मैं तेरी गृहस्थी खराब नहीं कर सकती। तुझे सब पता है फिर क्यों जिद करता है मुझे अपने पास रखने की। जो मेरे घर आकर मेरी किचन मे मदद नहीं कर सकती। वो अपने घर क्या करेगी? ये उसकी सासु माँ का घर है,उसका नहीं। वो मदद चाहकर भी नहीं करेगी। नम आँखो से बेटे की चुप्पी देख माँ सब समझ रही थी,और हालात व वक्त की नजाकत को देखकर चुपचाप शगुन का लिफाफा बहू को देकर बहू के लिये नाश्ता बनाने लगी। इधर बेटा चाहकर भी कुछ न कह सका ।

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