इस अंक के रचनाकार

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शनिवार, 20 अगस्त 2022

लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की नवगीत

हमें सद्प्रयास करना होगा


 

इत्र से महके बदन, तो वह समझ लो बेकार है,
सदचरित्र से जीए जीवन से, महकता संसार है।
इत्र की खुशबू, बस! कुछ घड़ी में खत्म हो जाती,
सद्कर्मों से बदल सकता, समाज व परिवार है।।


परिवार और समाज बदलने से, होती है प्रगति,
हमारे विचारों में परिवर्तन की, आती ख़ूब गति।
अच्छे विचारों से महकने लगता, हमारा जीवन,
हम सद्प्रयास करते रहें, आगे जैसी हो नियति।।


हमारे सद्प्रयासों को, भाग्य भी देता है संबल,
जीवन में असंभव कार्य भी, हो सकते हैं हल।
सद्प्रयासों में प्रायः मुश्किलों से, होता सामना,
हाथ की रेखाएँ भी बदल जाती, जो हैं अटल।।


जीवन में कभी कभी सद्प्रयास, नहीं होते सफल,
हम अपने को कभी न अकेला माने, न ही निर्बल।
अकेले गाँधी जी ने, आज़ादी के लिए बढ़ाए पाँव,
फिर पूरा देश उनके साथ, कदम मिला दिया चल।।


हम अपने जीवन में सद्प्रयास को, कभी न छोड़ें,
जो जीने के तय किए सिद्धांत, उसे कभी न तोड़ें।
कभी सफलता, कभी विफलताओं का होगा दौर,
विजय मिले, उन कोशिशों को अपनी ओर मोड़ें।।



आदर्श बने हमारा परिवार

कुछ ऐसा करने की कोशिश, आदर्श बने हमारा परिवार,
संस्कृति, सभ्यता हम सीखें, खूब मिलें अच्छे संस्कार।
धन-दौलत भले ही कम हो, सद्गुण, विवेक अनंत मिले,
अनुजों को स्नेह खूब दें, बड़ों का करें आदर-सत्कार।।

परस्पर सहयोग भावना, परिवार के प्रति हो समर्पण,
जब पड़े जरुरत तो तन मन धन से सर्वस्व करें अर्पण।
परिवार में इक-दूजे के, सुख-दुःख का हम रखें ख्याल,
हम समझें मन की बातें, खुशियों का बनें हम दर्पण।।


मात-पिता और बड़ों के, अनुभव का हम लाभ उठाएँ,
अपनी खुशियों के लिए, उन्हें हम वृद्धाश्रम न पंहुचाएँ।
जन्म दिया और पालन-पोषण कर, हमें योग्य बनाया,
कोशिश हो उनकी आँखों में, आजीवन आँसू न आएँ।।

छोटी-छोटी बातों के लिए, हम कदापि न करें तकरार,
छोटों और बड़ों के प्रति सदैव, हमारा हो मृदु व्यवहार।
विचारों में कभी भिन्नता हो, रिश्तों में न लाएँ खटास,
त्रुटि कभी किसी से हो जाए, कम न होने पाए प्यार।।

जब होगा सामंजस्य, परिवार की होगी इक पहचान,
देखने से आँखों में हो हर्ष, हम दें इक-दूजे को सम्मान।
परिवार में न होगा दुर्भाव, न होगा कभी यूँ मनमुटाव,
खुशियों का होगा आगमन, परिवार की बढ़ेगी शान ।।

छल, कपट या ईर्ष्या न हो, समस्याओं पर करें विमर्श,
परिजन करते जब प्रगति, ह्रदय में होता असीम हर्ष।
मत भिन्नता होने पर आपस में मिल-जुलकर दूर करें,
दूर तक फैलेगी यश-कीर्ति, परिवार का होगा उत्कर्ष।।

राष्ट्र हित हो सर्वोपरि

राष्ट्र हित की बात हो, निज स्वार्थ को करें परित्याग,
एकजुटता को दिखाकर देश प्रेम का गाएँ हम राग।
धर्म भाषा जाति मज़हब को तब गौण कर दीजिए,
हमारे सीने में जलनी चाहिए, राष्ट्र प्रेम की आग।।

राष्ट्र हित के लिए देशभक्तों ने, प्राण बलिदान किए,
देश की आजादी के लिए, परिवार वीरों ने तज दिए।
सीने पर खाई गोलियाँ व हँस कर फाँसी पर लटके,
घास की रोटी खाएँ, देश के आन बान शान के लिए।।

देश हित में ऋषि दधीचि ने किया अस्थियों का दान,
गांधी जी तन मन धन लगाए, देश का हो कल्याण।
सुभाषचंद्र बोस ने जीवन देश को समर्पित कर दिया,
भगतसिंह आजाद जैसे रणबांकुरों ने लगाई जान।।

देश की प्रगति व खुशहाली का सदा हम रखें खयाल,
अमन चैन सर्वत्र विराजे, कोई न भूखा, न रहे कंगाल।
समरसता, सद्भावना और एक दूजे के लिए सम्मान,
सुख-शांति से सब जीवन जिए, हम भी रहे खुशहाल।।

देश व समाज हित के लिए हृदय में में आए सुविचार,
कटुता और वैमनस्यता का हम कभी न करें व्यवहार।
देश हित में, परिवार हित हो सके तो, हम गौड़ कर दें,
सभी से हम रखें प्रेम मोहब्बत, न हो किसी से तकरार।।

ग्राम-कैतहा, पोस्ट-भवानीपुर
जिला-बस्ती 272124 (उ. प्र.)
मोबाइल 7355309428
laldevendra204@gmail.com


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